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Friday, 30 August 2019

सरसो की उन्नत खेती कैसे करे - 9540019555

            

सरसो की खेती लगभग सभी जगहों पे की जाती है सरसो की खेती किसान ज्यादातर तेल के लिए करते है हालाँकि सरसो सा साग भी लोग बड़े चाव  से खाते है इसके प्रयोग  करने से प्रोटीन खनिज तथा विटामिन ए और सी की अधिक मात्रा मिलती है 
सरसो के लिए भूमि तैयार करे ?
सरसो के लिए ठंढे लवायु की आवश्यकता होती है इस फसल को ठंढी में लगाई जाती है इसकी बुवाई के लिए 30  डिग्री सेंग्रेड तापमान अच्छा माना जाता है ये फसल ज्यादा तापमान बर्दास्त नहीं कर सकता ज्यादा तापमान से बीज अच्छा अंकुरत नहीं हो पाता है सरसो के लिए बलुई दोमट मिटटी अच्छी मानी जाती है भारी व हलकी चिकनी मिट्टी में भी उगाई जा सकती है अच्छी पैदावार  लिए बुवाई से पहले खेत को अच्छी तरह 3,4 बार  जोतवाना चाहिए खेत अच्छी तरह भुरभुरी हो जाये 
 खेत में देशी खाद डालकर व मिलाकर मेड़-बन्दी करके क्यारियां बनानी चाहिए 
रासायनिक खादों का प्रयोग 

 थायो यूरिया के प्रयोग से सरसों की उपज को 15 से 20  % तक  बढाया जा सकता है सडी हुई गोबर की खाद एक महीने पहले खेत में डाल  दे और उसकी जुताई अच्छी तरीके से कराये गोबर की खाद में मुख्य पोषक प्राप्त होती है खेत में अच्छी फसल के लिए यूरिया,फास्फोरस,सल्फर ,पोटास,MOP , की भी आवश्कता होती है जिंक डालने से फसल में करीब  20 % तक की बढ़ोतरी होती है  
 कीट एवं रोग प्रबंधन:- 
सरसों की उपज को बढ़ाने के लिए और रोगों का बहुत की ध्यान रखना होता है क्यूंकि किट हमारे फसल को काफी नुकसान पहुचाते है जिसके वजह से हमें उपज में कमी आजाती है अगर हम समय के रहते रोगों और कीटो पर नियंत्रण कर लेते है तो उपज में काफी फायेदा हो सकता है 
सरसों में लगने वाले रोग और किट :-
माहू :- माहू पंखहीन या पंखयुक्त हल्के स्लेटी या हरे रंग के होते है ये 1.5 MM से 3 MM लम्बे होते है चूसने वाले किट होते है ये फूलो और पौधों के कोमल तनो बार बैठ कर उससे चूस कर उसे कमजोर बना देते है ये किट दिसम्बर महीने से लेकर जनवरी से लेकर मार्च तक बना रहता है जब भी इनका प्रकोप हो तब डाइमिथोएट (रोगोर) 30 ई सी या मोनोक्रोटोफास (न्यूवाक्रोन) 36 घुलनशील द्रव्य की 1 लीटर मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए अगर जरुरत पड़े तो दुबारा 15 दिन बाद फिर छिडकाव करे अगर थोड़े बहुत है तो आप शाखाओ को तोड़ कर जमीन में गाड दे  
आरा मक्खी:- ये मक्खी के लगने पर मेलाथियान का छिडकाव करे जरुरत पड़ने पर दुबारा भी छिडकाव करे 

चितकबरा किट :-  इस किट के लगने पर मेलाथियान का छिडकाव करे 
बिहार हेयरी केटरपिलर : - इसके रोकथाम के लिए मेलाथियान का छिडकाव पुरे फसल पर करे 
सफेद रतुवा:- अगर फसल पर लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब, डाइथेन एम-45 या रिडोमिल एम.जेड. 72 डब्लू.पी. का छिडकाव करे 15 ,15 दिन के अंतर छिडकाव से बचा जा सकता है 
काला धब्बा या पर्ण चित्ती : - अगर ये किट दिखाई दे तो आईप्रोडियॉन (रोवरॉल), मेन्कोजेब (डाइथेन एम-45) का अच्छे से छिडकाव करे 
चूर्णिल आसिता:- चूर्णिल आसिता रोग की रोकथाम के लिए  घुलनशील सल्फर (0.2 प्रतिशत) या डिनोकाप (0.1 प्रतिशत) का घोल बनाकर रोग के लक्षण दिखाई देने पर अच्छे से छिड़काव करें 
तना लगन:- कार्बेन्डाजिम (0.1 प्रतिशत) फफूंदीनाशक का छिड़काव दो बार फूल आने के समय 20 दिन के अन्तराल (बुआई के 50वें व 70वें दिन पर) छिडकाव कर के इससे बच सकते है 

पूसा बोल्ड:- ये 110 से 140 दिन में पक जाती है इसकी उपज 2000 से 2500 किलोग्राम हेक्टर होती है इसमें 40 % तक तेल निकलता है इसकी खेती राजथान,गुजरात दिल्ली, महाराष्ट्र में की जाती है 
पूसा जयकिसान (बायो 902):- ये 155-135 दिन में पक जाती है इसकी उपज 2500-3500 हेक्टर होती है इसमें 40 % तक तेल निकलता है इसकी खेती गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान में की जाती है 
क्रान्ति:- ये 125-135 में पक जाती है इसकी उपज 1100-2135 हेक्टर होती है इनमे 42 % तेल निकलता है इसकी खेती हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान में की जाती है  
आर एच 30:- ये 130-135 दिन में पाक जाती है इसकी उपज 1600-2200 प्रति हेक्टर होती है इनकी खेती हरियाणा, पंजाब, पश्चिमी राजस्थान में की जाती है 
आर एल एम 619:- ये 140-145 दिन में पाक जाती है इसकी उपज 1340-1900 प्रति हेक्टर होती है इसमें 42 % तेल निकलता है इसकी खेती गुजरात, हरियाणा, जम्मू व कश्मीर, राजस्थान में की जाती है 
पूसा विजय:- ये 135-154 दिन में पक जाती है इसक उपज 1890-2715 प्रति हेक्टर होती है इनमे 38% तेल निकलता है इसकी खेती दिल्ली में की जाती है
पूसा मस्टर्ड 21:-  ये 137-152 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1800-2100 प्रति हेक्टर होती है इनमे 37 % तेल निकलता है इनकी खेती पंजाब, दिल्ली, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में होती है 
पूसा मस्टर्ड 22:- ये 138-148 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1674-2528 प्रति हेक्टर होती है इनमे 36 % तेल निकलता है इसकी खेती पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में की जाती है  


बहुत बार हम खेत को तैयार करने में लेट हो जाते है या हमारा खेत समय से तैयार नहीं हो पाता है उसके लिए आप इस प्रजाती को भी बो सकते है इनकी इस प्रजाती को हम लेट से बोते है लेकिन समय से तैयार हो जाती है 

एन आर सी एच बी  101:- ये  120-125 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1200-1450 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान में की जाती है 

सी एस 56 :-  ये  113-147 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1170-1425 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती  इसकी खेती पंजाब, हरियाणा, राजस्थान में की जाती है 

आर आर एन 505:- ये  121-127 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1200-1400 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती राजस्थान में की जाती है 
आर जी एन 145 :- ये 121-141 दिन में पक जाती है इसकी उपज 1450-1640 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती दिल्ली पंजाब, हरियाणा में की जाती है 
पूसा मस्टर्ड 24 :-  ये 135-145  दिन में पक जाती है इसकी उपज 2020-2900 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, जम्मू व कश्मीर में की जाती है 

पूसा मस्टर्ड 26 :- ये  123-128  दिन में पक जाती है इसकी उपज 1400-1800 प्रति हेक्टर होती है इसकी खेती जम्मू व कश्मीर, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली, उत्तर प्रदेश में की जाती है 

खरपतवार 
अगर खेत में खरपतवार हो तो उससे अच्छी तरह से देख कर निकाल कर बाहर फेक दे खरपतवार ज्यादा खेत में होने से हमारी फसल को नुकसान पहुंचते है

सिचाई प्रबंधन ?
समय समय पर जब भी  खेत में नमी की कमी हो समय पर सिचाई करना जरुरी है अगर बारिश होती है तो बारिश के ऊपर  निर्भर करता है लेकिन जब भी खेत में नमी  की कमी हो सिचाई करे 

कटाई कैसे करे ? फसल लगभग फ़रवरी से लेकर मार्च तक तक पाक जाती है फसल की पैदावार जब 75% तक फल पिली हो जाये तब ही कटाई करे अगर आपके पास समय है तो फसल की कटाई सुबह में ही करे क्यूंकि सुबह में कटाई करने से आपके फसल नरम रहती है और आपकी फसल ज्यादा बिखरती नहीं है
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सरसों की उन्नत खेती - 9540019555

सरसों की खेती (Mustard farming) मुख्य रूप से भारत के सभी क्षेत्रों पर की जाती है| सरसों की खेती (Mustard farming) हरियाणा, राजस्‍थान, मध्‍यप्रदेश, उत्‍तर प्रदेश और महाराष्‍ट्र की एक प्रमुख फसल है| यह प्रमुख तिलहन फसल है| सरसों की खेती (Mustard farming) खास बात है की यह सिंचित और बारानी, दोनों ही अवस्‍थाओं में उगाई जा सकती है|

उपयुक्त जलवायु

भारत में सरसों की खेती (Mustard farming) शीत ऋतु में की जाती है| इस फसल को 18 से 25 सेल्सियस तापमान की आवष्यकता होती है| सरसों की फसल के लिए फूल आते समय वर्षा, अधिक आर्द्रता एवं वायुमण्ड़ल में बादल छायें रहना अच्छा नही रहता है| अगर इस प्रकार का मोसम होता है, तो फसल पर माहू या चैपा के आने की अधिक संभावना हो जाती हैं|
बुवाई का समय
सरसों की खेती से अच्छी पैदवार के लिए बारानी क्षेत्रों में सरसों की बुवाई 25 सितम्बर से 15 अक्टूबर तथा सिचिंत क्षेत्रों में 10 अक्टूबर से 25 अक्टूबर के बीच करनी चाहिए| जबकि पीली सरसों के लिए 15 सितम्बर से 30 सितम्बर उपयुक्त रहता है|
बीज की मात्रा
सिंचित क्षेत्रो में सरसों की फसल की बुवाई के लिए 5 से 6 किलोग्राम बीज प्रति हैक्टर के दर से प्रयोग करना चाहिए, और असिंचित क्षेत्रों के लिए इसकी मात्रा 10 से 15 प्रतिशत बढ़ा देनी चाहिए है| जबकि पीली सरसों के 4 किलोग्राम बीज का उपयोग प्रति हेक्टेयर करना उपयुक्त रहता है|

बीजोपचार

1. जड़ सड़न रोग से बचाव के लिए बीज को बुवाई के पूर्व फफूंदनाशक वीटावैक्स, कैपटान, साफ, सिक्सर, थिरम, प्रोवेक्स मे से कोई एक 3 से 5 ग्राम दवा प्रति किलो बीज की दर से उपचारित करे|
2. कीटो से बचाव हेतु ईमिडाक्लोप्रिड 70 डब्लू पी, 10 मिलीलीटर प्रति किलोग्राम बीजदर से उपचरित करें|
3. कीटनाशक उपचार के बाद मे एज़ेटोबॅक्टर तथा फॉस्फोरस घोलक जीवाणु खाद दोनो की 5 ग्राम मात्रा से प्रति किलो बीजो को उपचारित कर बोएँ|
बोने की विधि
सरसों की खेती के लिए बुवाई कतारों में करना अच्छा रहता है| इसके लिए कतार से कतार की दूरी 25 से 35 सेंटीमीटर व पौधे से पौधे की दूरी 8 से 10 सेंटीमीटर रखे तथा बीज की गहराई 5 सेंटीमीटर रखे तथा असिंचित क्षेत्रों में बीज गहराई नमी अनुसार रखे|

सिंचाई प्रबंधन

सरसों की खेती के लिए 4 से 5 सिचांई पर्याप्त होती है| यदि पानी की कमी हो तो चार सिंचाई पहली बुवाई के समय, दूसरी शाखाएँ बनते समय (बुवाई के 25 से 30 दिन बाद) तीसरी फूल प्रारम्भ होने के समय (45 से 50 दिन) तथा अंतिम सिंचाई फली बनते समय (70 से 80 दिन बाद) की जाती है| यदि पानी उपलब्ध हो तो एक सिंचाई दाना पकते समय बुवाई के 100 से 110 दिन बाद करनी लाभदायक होती है| सिंचाई फव्वारे विधि द्वारा करनी चाहिए|

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