गाजर की उन्नत खेती
गाजर की खेती के लिये अच्छी जल निकासी वाली रेतीली दोमट मिटटी होनी चाहिए। हल्की मिटटी मे जड की वृध्दि अच्छी होती है। भारी मिटटी गाजर की खेती के लिये उपयुक्त नही होती। गाजर शीत ऋतु की फसल है। गाजर बुवाई का समय जुलाई से 25 अक्तूबर होता है गाजर बुवाई 40 सें.मी. के अन्तराल पर बनी मेंड़ों पर 2 से 3 सें.मी. गहराई पर करें और पतली मिट्टी की परत से ढक दें। जिसके बीज अकुरण के लिये 8 से 20 डिग्री तापमान की आवश्यकता पडती है। जबकि जडो की वृध्दि एवं विकास के लिये 15 से 20 डिग्री तापमान उपयुक्त होती है। अधिक तापमान होने पर जडो गाजर के आकार छोटे, मोटे तथा रस की मात्रा कम हो जाती है।
गाजर की यह किस्म लम्बी, लाल रंग की व जड़ें नुकीली तथा 85 से 95 दिनों में तैयार की जाती है लगभग ढाई से तीन महीनों में गाजर जड़ें निकास के लिए तैयार हो जाती हैं और औसतन 20 से 30 टन प्रति हैक्टर उपज हो जाती है
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